Himachal News: सपनों का आशियाना बनाना कहीं रह न जाए सपना ddnewsportal.com

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Himachal News: सपनों का आशियाना बनाना कहीं रह न जाए सपना

प्रदेश में भवन निर्माण सामग्री के दाम चढ़े, सरिया सहित रेत-बजरी और ईंटों के रेट में इतना इजाफा...

हर इन्सान का एक ख्वाब होता है कि उसका एक सुन्दर सा घर हो। इसी सपनों के आशियने के दिए इन्सान उम्र भर जी-तोड़ मेहनत कर खून पसीना एक करता है। इस उम्मीद में कि जीवन के एक मोड़ पर पंहुचकर इतनी कमाई कर लें कि एक अच्छा सा घर बना सके जिसमे उम्र के आराम करने के समय को सूकून से बिता सके। लेकिन यदि आशियाना बनाने के समय अचानक निर्माण सामग्री के रेट काफी बढ़ जाएं तो कईयों के सपने धराशाई होते देर नही लगती। ऐसा ही हिमाचल प्रदेश में होने जा रहा है जो बहुत से मध्यम वर्ग के लोगों के सपनों के आशियाना बनाने का सपने को तोड़ सकता है।


हिमाचल प्रदेश में आपदा के बीच लोगों के सामने एक और मुसीबत खड़ी हो गई है। भवन सामग्री के दाम बढ़ने से नया आशियाना बनाना महंगा हो गया है। दूसरी ओर प्रदेश में डीजल पर तीन रुपये वैट बढ़ाने से भी भवन निर्माण की सामग्री के दाम चढ़ गए हैं। खासकर बजरी, रेत और ईंटों के दाम में भी वृद्धि हो गई है। टिप्पर और ट्रक मालिक का कहना है कि पांच से छह माह पूर्व पहले बजरी का टिप्पर 6,000 रुपये में आता था, अब 6,500 से 7,000 रुपये में मिल रहा है।
वहीं, रेत में भी 1,000 रुपये प्रति टिप्पर तक इजाफा हो हुआ है। सड़कें बाधित होने से सप्लाई करने में भी खासी मुश्किलें हो रही हैं। समय पर सामग्री उपलब्ध नहीं हो रही है। उधर, सरिया के कारोबारियों का कहना है कि कईं जगह ट्रकों की आवाजाही वक्त पर नहीं हो रही है और डीजल में बढ़ोतरी की वजह से सरिया और ईंटों के रेट बढ़े हैं। कुल्लू में छह माह पहले एक ईँट का रेट 9.50 रुपये था, जो अब 10 रुपये हो गया है।


निर्माण सामग्री के दाम बढ़ने से बीते दिनों आई बाढ़ में तबाह हुए भवन, होटल, दुकानों को नए सिरे से बनाना महंगा हो गया है। भारी बारिश और ब्यास में बाढ़ से जिला कुल्लू में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। सिरमौर में भी सड़कों, बिजली व पेयजल स्कीमों को भारी नुकसान हुआ है। राज्य में सैकड़ों मकानों और दुकानों का नामोनिशान मिट गया है। इन मकानों को दोबारा बनाने के लिए लोगों को जेब ढीली करनी होगी।