Sirmaur: राजगढ़ सड़क निर्माण प्रकरण: वन भूमि अतिक्रमण एवं सरकारी धन के कथित दुरुपयोग मामले में एसवी एंड एसीबी ने जांच की तेज ddnewsportal.com

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Sirmaur: राजगढ़ सड़क निर्माण प्रकरण: वन भूमि अतिक्रमण एवं सरकारी धन के कथित दुरुपयोग मामले में एसवी एंड एसीबी ने जांच की तेज

जांच का दायरा बढ़ा; मनी ट्रेल और अधिकारियों की भूमिका भी इनवेस्टिगेशन के दायरे में, साक्ष्यों के आधार पर अंर गिरफ्तारियों की संभावना

राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) की विशेष अन्वेषण इकाई (SIU), शिमला द्वारा थाना एसवी एंड एसीबी, नाहन में भारतीय दंड संहिता तथा भारतीय वन अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के अंतर्गत दर्ज प्राथमिकी की जांच की जा रही है। यह मामला राजगढ़, जिला सिरमौर में जूनियो से कुल्थीधार, बसोटी एवं दूधधाम तक निर्मित संपर्क सड़क के निर्माण में सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, सरकारी वन भूमि के अवैध उपयोग, स्वीकृत सीमा से अधिक निर्माण, अनधिकृत अतिक्रमण तथा आपराधिक षड्यंत्र के आरोपों से संबंधित है।

जांच के दौरान एसआईयू द्वारा आरोपी जसवंत सिंह को गिरफ्तार कर माननीय न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, राजगढ़ के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां न्यायालय ने पूछताछ हेतु दो दिन का पुलिस रिमांड प्रदान किया। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से कथित वित्तीय लेन-देन, सड़क निर्माण, सरकारी भूमि के उपयोग तथा मामले से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के संबंध में विस्तृत पूछताछ की गई। रिमांड अवधि पूर्ण होने के उपरांत माननीय न्यायालय ने दिनांक 4 जुलाई 2026 को निर्धारित शर्तों के अधीन आरोपी को जमानत प्रदान की।

प्रारंभिक जांच में यह तथ्य सामने आए हैं कि उक्त सड़क का निर्माण कथित रूप से मुख्यतः आरोपी की निजी भूमि तक पहुंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया गया तथा निर्माण कार्य स्वीकृत वन क्षेत्र से आगे बढ़कर सरकारी वन भूमि एवं शामलात भूमि पर कथित अतिक्रमण तक पहुंचा हो सकता है। एसआईयू द्वारा मामले से जुड़े मनी ट्रेल, धन के स्रोत, संदिग्ध बेनामी स्वामित्व, वित्तीय लेन-देन तथा परियोजना की योजना, स्वीकृति एवं क्रियान्वयन में सार्वजनिक सेवकों एवं निजी व्यक्तियों की भूमिका की भी विस्तृत जांच की जा रही है। इन सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है तथा इस संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है।

अन्य संदिग्ध व्यक्तियों, यथा यश अग्रवाल एवं मनीष अग्रवाल, को माननीय न्यायालय द्वारा 14 जुलाई 2026 तक अंतरिम जमानत प्रदान की गई है। जांच अधिकारी द्वारा सभी आरोपियों एवं संदिग्ध व्यक्तियों को आवश्यकता अनुसार सतर्कता मुख्यालय, शिमला में जांच में शामिल होने हेतु विधि अनुसार नोटिस जारी किए गए हैं। उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं तथा दस्तावेजी, वित्तीय एवं इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया जा रहा है।

मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष एवं व्यापक जांच जारी है तथा जांच के दौरान उपलब्ध होने वाले साक्ष्यों के आधार पर विधि अनुसार आगे की आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

प्रवक्ता, राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बताया कि "राजगढ़ सड़क निर्माण मामले की जांच निष्पक्ष, पारदर्शी तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। सरकारी धन के कथित दुरुपयोग, सरकारी वन भूमि पर कथित अतिक्रमण, वित्तीय लेन-देन, मनी ट्रेल तथा सार्वजनिक सेवकों एवं निजी व्यक्तियों की संभावित भूमिका सहित मामले के प्रत्येक पहलू की गहन जांच की जा रही है।

जांच के दौरान जिन व्यक्तियों की संलिप्तता साक्ष्यों के आधार पर स्थापित होगी, उनके विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। जहां आवश्यक होगा, वहां विधि के अनुरूप गिरफ्तारी सहित सभी वैधानिक कदम उठाए जाएंगे। जांच में शामिल होने के लिए आरोपियों एवं अन्य संदिग्ध व्यक्तियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। किसी भी व्यक्ति की स्थिति या पद की परवाह किए बिना, यदि साक्ष्यों से उसकी संलिप्तता स्थापित होती है तो उसे किसी भी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी।"