Devi Chitralekha Ji: कौन है देवी चित्रलेखा जी, जिन्होंने 6 वर्ष की उम्र में ही शुरु कर दिया था कथावाचन! यहाँ पढ़ें उनका पूरा परिचय... ddnewsportal.com
Devi Chitralekha Ji: कौन है देवी चित्रलेखा जी, जिन्होंने 6 वर्ष की उम्र में ही शुरु कर दिया था कथावाचन! यहाँ पढ़ें उनका पूरा परिचय...
पाँवटा साहिब में पिछले 7 दिनों से श्रीमद्भागवत कथा का वाचन अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक पूज्या देवी चित्रलेखा की मधुर वाणी का जादू भक्तों के सिर चढ़कर बोल रहा है। यहीं कारण रहा कि इस कथा का श्रवण करने रोजाना हजारों की संख्या में भक्तजन पहुंचे और श्रीहरि का उनके मुखारविंद से व्याख्यान सुना। इसलिए आज हम आपको देवी चित्रलेखा के बारे में कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं जो आपको शायद ही मालूम हो।

सोशल मीडिया पर अक्सर देवी चित्रलेखा जी (Devi Chitralekha Ji) की कथाएं और भजन वायरल होते रहते हैं। आपने भी जरूर उनके आध्यात्मिक प्रवचनों और प्रेरणादायक विचारों को सुना या देखा होगा, जो लोगों के दिलों को छू जाते हैं। पाँवटा साहिब में तो आपने इन्हे साक्षात देखा और सुना है।
दरअसल, जिस उम्र में युवा अपना करियर बनाने और जिंदगी को जीने में व्यस्त होता है, उस उम्र में देवी चित्रलेखा जी समस्त समाज को धर्मशास्त्र का कथावाचन करके उनका मार्गदर्शन कर रही हैं। सोशल मीडिया पर उनकी कही बातों को तो आपने शायद सुना ही होगा लेकिन क्या आप जानते हैं, देवी चित्रलेखा जी कौन है और इतनी कम उम्र में वो इतनी प्रख्यात कथावाचक कैसे बनीं।
■ कौन हैं देवी चित्रलेखा जी?
देवी चित्रलेखा जी का जन्म 19 जनवरी 1997 को हरियाणा के पलवल जिले के खंबी गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जब देवी चित्रलेखा जी का जन्म हुआ, तब उनके जन्म की खुशी में बहुत से साधु-संतों को आमंत्रित किया गया। तब एक संत ने उनके पिता से कहा कि आपकी ये बेटी बहुत ही चमत्कारी है, ये बड़ी होकर एक महान व्यक्तित्व बनकर उभरेगी। जल्द ही संत की कही ये बात पूरी दुनिया के सामने सच भी होने लगी।
■ चार साल की उम्र में ही शुरू की धार्मिक ग्रंथों की शिक्षा:
जब देवी चित्रलेखा जी सिर्फ चार साल की थीं, तब उनके पिता ने उन्हें श्री गिरधारी बाबा जी के आश्रम में गौड़ीय वैष्णववाद की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेज दिया था। इसके अलावा उनकी स्कूली पढ़ाई पलवल के ही एक सरकारी स्कूल से हुई। 2 साल तक कथावाचन की ट्रेनिंग लेने के बाद 6 साल की उम्र में उन्होंने खुद कथावाचन करना शुरू कर दिया था। आज देवी चित्रलेखा जी समस्त देश के लिए कथावाचक के तौर पर एक प्रेरणा बन चुकी हैं। साल 2019 में देवी चित्रलेखा जी को आध्यात्मिक और युवा उपदेशक के लिए “वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स” से सम्मानित भी किया जा चुका है।
देवी चित्रलेखा जी अपने सुरीले भजनों और कथावाचन से आज करोड़ो लोगों का मार्गदर्शन कर रही हैं और वो आगे भी इसी तरह समाज की बेहतरी के लिए अपने इस कार्य को जारी भी रखना चाहती हैं।

देवी चित्रलेखा का जन्म 19 जनवरी 1997 को हरियाणा के पलवल जिले के खंबी गांव में पिता तुकाराम शर्मा और माता चमेली देवी के घर हुआ। देवी चित्रलेखा के बड़े भाई का नाम प्रत्यक्ष शर्मा है। देवी चित्रकला छोटी-सी उम्र में ही एक संत के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त करने के लिए घर से दूर आश्रम में रहीं और वहीं से उन्होंने कथा वाचन सीखा और वक्त के साथ-साथ वह भारत की मशहूर कथावाचक बन गईं।
देवी चित्रलेखा की शादी को लेकर अक्सर कई अफवाहें आती हैं, हालांकि खुद चित्रलेखा ने इन अफवाहों का खंडन करते हुए कहा था कि ये खबर भ्रामक है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। देवी चित्रलेखा के पति का नाम माधव प्रभु है, जिनका असली नाम माधव तिवारी है जो कि छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के रहने वाले हैं।