Sirmaur: धनतेरस और दीपावली पर पूजा के लिए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कमलकांत सेमवाल ने बताया उपयुक्त समय ddnewsportal.com
Sirmaur: धनतेरस और दीपावली पर पूजा के लिए प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कमलकांत सेमवाल ने बताया उपयुक्त समय, दीपोत्सव पर्व पर जानिए पूजन का शुभ मुहूर्त...
दीपावली के पंचपर्व की शुक्रवार को धनतेरस से शुरुआत हो रही है। पांच दिनों तक चलने वाले इस महा उत्सव पर लोग जहां खूब खरीददारी और एक दूसरे को उपहार देते हैं वहीं इस पर्व के दौरान पूजन का भी अपना अलग महत्व होता है। जो लोग पूजा पाठ पर विश्वास रखते हैं वो शुभ मुहूर्त भी देखते हैं। इसीलिए सिरमौर जिला के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कमलकांत सेमवाल ने "देश दिनेश" के माध्यम से पाठकों के लिए धनतेरस और दीपावली पर पूजा का शुभ मुहूर्त बताया है।

शुक्रवार को धन त्रयोदशी का पर्व मनाया जा रहा है। शनिवार 07 नवंबर को महा शिवरात्रि, हनुमान जयंती और छोटी दीपावली मनाई जाएगी और रविवार 08 नवंबर को दीपों का महापर्व दीवाली देशभर में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगी। इसके लिए जहां बाजार सज गये हैं वहीं लोग भी दीवाली की खरीददारी में जुटे हुए हैं। ज्योतिषाचार्य पं सेमवाल ने बताया कि पर्व पर लक्ष्मी पूजन के वैसे तो दिनभर लग्न के हिसाब से कईं मुर्हुत है लेकिन मुख्य रुप से गृहस्थ लोगों के लिए प्रदोष काल का पूजा के लिए विशिष्ट मुर्हुत है। पं कमलकांत का कहना है कि दीपावली हिन्दु धर्म का मुख्य पर्व है। रोशनी का पर्व दीवाली कार्तिक अमावस्या के दिन मनाई जाती है। मान्यता है कि दीपों से सजी इस रात में मां लक्ष्मी जी भ्रमण के लिए निकलती है और अपने भक्तों को खुशियां बांटती है।
दीवाली भगवान श्रीराम के लंका पर विजयी के पश्चात अयोध्या लौटने की खुशी मे मनाई जाती है। इस मौके पर लोग घर मे घी के दिए जलाते है और इस त्यौहार का खूब आनद लेते है। इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा का विधान है। दीपावली के दिन दीपदान का विशेष महत्व है। नारद पुराण के मुताबिक इस दिन मन्दिर, घर, नदी, बगीचे, वृक्ष, गौशाला और बाजार में दीपदान देना शुभ माना जाता है। इस दिन जो कोई श्रद्वापूर्वक मां लक्ष्मी की पूजा करता है। उसके घर कभी दरिद्रता का वास नही होता। दीपावली के दिन घर में चौमुखा दीपक रात को प्रदीप्त होना चाहिए।

■ पूजा विधि-
मां लक्ष्मी से पूर्व गणेश जी की पूजा करें। उसके बाद मां लक्ष्मी, सरस्वती, कुबेर, कमल, दवात की पूजा करें। बही खातों की भी पूजा करें। मां लक्ष्मी की मूर्ति गणेश जी के दाईं और रखें। एक कलश स्थापित करें। कलश को चावलों की ढेरी पर स्थापित करें। दो बड़े दीपक रखें। एक दीपक तेल का और एक दीपक घी का प्रज्वलित करें। कलश की तरफ चावलों से नौ ढेरियां नवग्रह के रूप में बनाएं। गणेश जी के सामने चावलों से 6 ढेरियां षोडष मातिृका के रूप में बनाए एवं स्वास्तिक का चिन्ह भी बनाएं। चौकी के सामने तीन थाली जिसमें खील, पताशे, मेवे इत्यादि रखे। जलभर कर कलश रखें। धनतेरस पर जो पात्र खरीदा हैं उसमें अन्न भर कर रखें।
■ मां लक्ष्मी के प्रिय-
मां लक्ष्मी को पूजा में कमल के फूल व गुलाब प्रिय है। फल में श्रीफल, सीताफल, बैर, अनार, सिंघाड़े प्रिय है। सुगंध में केवडा, गुलाब, जल, चन्दन व पित्र प्रिय है। अनाज में चावल, मिठाई में केसर की मिठाई का हलवा। दीपक प्रकाश के लिए गाय का घी, मुंगफली या तिल का तेल इनको शीघ्र प्रसन्न करता है। गन्ना, रबडी, हल्दी, कमल गठ्ठा, बिलपन्न आदि भी इन्हे प्रिय है। स्कन्द पुराण के मुताबिक कार्तिक अमावस्या को प्रातः स्नान कर सभी देवताओं की पूजा करनी चााहिए।
■ ये है पूजन का शुभ समय-
दीपावली का पर्व शुभ पर्व है। इस दिन लक्ष्मी, गणेश, कुबेर व इंद्र देव की पूजा करनी चाहिये। प्रदोष काल मे पूजा का शुभ विधान है, अतः इस समय की गयी पूजा सभी मनोरथो को पूरा करती है। इस दिन पूजा का शुभ समय इस प्रकार है:-
धन त्रयोदशी और लक्ष्मी पूजा मुहूर्त: पं सेमवाल के मुताबिक धन त्रयोदशी 6 नवम्बर 2026 शुक्रवार को धन्वन्तरि जयंती दीपदान, शाम को पूजा का शुभ समय सांय 5:33 बजे से 8:15 बजे रात्रि तक रहेगा।

इसी तरह 8 नवबर 2026 रविवार को दीपावली, महालक्ष्मी पूजन, इन्द्र, कुबेर पूजन और महाकाली पूजन होगा। दीपवाली पूजन समय शाम 5:31 बजे से 8:20 बजे रात्रि तक होगा। यह समय गृहस्थों के लिए है।
सोमवार शाम 06:05 बजे से 08:20 मिनट तक रहेगा। उसके बाद रात्रि 09:15 से रात्रि 10:30 तक होगा। यह पूजन समय प्रदोष काल का है जो गृहस्थियों के लिए शुभ होता है।