छात्रसंघ चुनाव पर जानियें सरकार और विवि का मूड़ ddnewsportal.com

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फोटो साभार गूगल

छात्रसंघ चुनाव पर जानियें सरकार और विवि का मूड़

प्रत्यक्ष रूप से चुनाव को सरकार पर छात्र संगठन बना रहे दबाव, अभी मेरिट आधार पर होता है चयन।

हिमाचल प्रदेश के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में इस बार भी प्रत्यक्ष रूप से छात्र संघ चुनाव होने के आसार जीरो हैं। विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 29 अगस्त को पीजी की प्रवेश प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। 30 अगस्त से स्नातक डिग्री कोर्स की नियमित कक्षाएं शुरू होंगी। कॉलेजों में नए शैक्षणिक सत्र की कक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। छात्र संगठन आठ सालों से प्रतिबंधित प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनावों की बहाली के लिए दबाव बनाने लगे हैं। एबीवीपी सांकेतिक भूख हड़ताल कर चुकी है। एसएफआई का

अखिल भारतीय जत्था नई शिक्षा नीति-2020 को लागू करने के विरोध और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार एससीए चुनाव बहाली को लेकर आम छात्रों को एकजुट करने लगा है। लेकिन चुनावी वर्ष में सरकार और विश्वविद्यालय चुनाव बहाली के मूड में नहीं लग रहे। छात्र गुटों के बीच 2014 में हुई हिंसा को आधार बनाकर और प्राचार्यों की चुनावों पर राय लेने के बाद विवि ने चुनाव पर रोक लगाई थी।


गोर हो कि प्रदेश विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद ने प्रत्यक्ष छात्र संघ चुनावों पर 2014 में प्रतिबंध लगाया था। 2013 में अंतिम बार कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की एससीए चुनी गई थी। परिसरों में हुई हिंसा पर प्राचार्यों की राय के बाद तत्कालीन कुलपति प्रो. एडीएन वाजपेयी ने ईसी में प्रस्ताव ले जा कर चुनावों पर प्रतिबंध लगाया। अप्रत्यक्ष मेरिट आधार पर एससीए मनोनयन का विकल्प दिया था। इस बार भी प्रत्यक्ष चुनाव की संभावना न के बराबर दिखाई दे रहि है।