नगर को साफ सुथरा रखने वाले गंदगी में क्यों... ddnewsportal.com

नगर को साफ सुथरा रखने वाले गंदगी में क्यों... ddnewsportal.com

नगर को साफ सुथरा रखने वाले गंदगी में क्यों...

हर दिन दुर्गंध में जीने को मजबूर है पांवटा नगर की इस बस्ती के बाशिंदे, आगामी चुनाव मे उठायेंगे ये बड़ा कदम।

कहावत है कि दीये तले अंधेरा होता है। यह कहावत पांवटा साहिब नगर की एक बस्ती पर सटीक बैठती नजर आती हैं। यहां पर नगर को जो लोग रौजाना चकाचक करते हैं उन्हीं के बच्चे व माता पिता गंदगी मे जीवन जीने को मजबूर है। अब यहां के लोग इतना परेशान हो चुके हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव का बाॅयकाट करने का मन तक बना चुके हैं। बात पांवटा साहिब की बाल्मिकी बस्ती की हो रही है। पांवटा साहिब शहर के बीचोबीच

बसी बाल्मीकि बस्ती में आजादी के 70 वर्षों बाद भी ना तो सड़क पहुंची है और ना ही 40 वर्षों से बह रहा खुला गंदा नाला बंद हुआ है। परेशान वाल्मिकी समाज के लोगों ने अब संघर्ष का रास्ता अपनाने की बात कही है। बस्ती के निवासी अमित कुमार, चीनू, रवि, सोनिया, कुसुम दर्जनों लोगों ने बताया कि अब हमारे बच्चे इस गंदगी में सांस नहीं लेंगे। आने वाली पीढ़ी के लिए बस्ती शहर की बाकी जगहों की तरह साफ सुथरी और सांस लेने लायक होगी, इसके लिए अगर संघर्ष का रास्ता भी अपनाना पड़ा तो बनाया जाएगा। राजनीतिक बात करें तो प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, उनके

मंत्री चौधरी सुखराम सहित कई पार्षद और चेयरमैन इस बस्ती का गन्दा नाला बंद करने का आश्वासन दे चुके हैं। वहीं गंदा नाला बंद करने के नाम पर यहां के लोगों से वोट लिए गए हैं। गोर हो कि पिछले 40 वर्षों से पांवटा साहिब की बाल्मिकी बस्ती के बीचो बीच गंदा नाला खुल कर बीमारियां फैला रहा है। ना कभी सफाई न कभी इसके आसपास जीने वाले लोगों की चिंता। बावजूद इसके इस बस्ती के लोग सुबह 4:00 बजे उठकर पूरे शहर की गंदगी को अपने कंधों पर उठा इस शहर को हर रोज जीने के लायक बना देते हैं। लेकिन अपने आप गंदगी पर बैठकर जीवन जीने को मजबूर है।